तेरी गली मुझ पर शक कर रही है
आज मुझे देख सब से कहती है
तू कल भी यहाँ आया था
पर मैं कब गया था मुझे पता नहीं
जो वहाँ था शायद मेरा साया था।
ऐ मेरी जान तू बता तुझे क्या लगता है
क्या मैं सच में बता वहाँ आया था
अब अगर सच ही बोलना है तुझको
तो इकरार तू ही कर मेरे जुर्म का
जो मैं तेरे ख़्वाबों में आ, कर आया था।
अगर तुझे भी ना हो यकीन मेरी आमद का
तो गवाही ले अपने घर के हर ज़र्रे की
जो साबित ना कर सका अपनी सफाई में
वो बेजान से बुत साबित कर देंगे
कल जो वहाँ था वोमेरा ‘साया’ था।
ऐ सनम तू ही मेरा मुंसिफ बन जा
और ये इल्जाम हट दे मुझसे
बता दे इस जहाँ को तू ख़ुद ही
की है मोहब्बत और न खता कोई
और जो कल वहाँ था तेरे सादिक आशिक का साया था।
अशांत

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