Poems

  • असमय मृत्यु

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    मेरा जो कुछ भी मुझ में थाहो गयी उसकीआज असमय मृत्यु। ये उसी दिन तय हो गया थाजब पहली बार मैंनेकुछ अलग करने को सोचा था। मेरे सपने बन गये…

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  • पैरों के निशान

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    पड़ते नहीं अब कहीं मेरे पैरों के निशानमेरी रूह मुझसे कब की जुदा हो चुकी है जो जलती थी मुझ में मैं चलता था जिस सेवो हसरत भी मुझसे विदा…

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  • क्यों इतने दूर हो मुझसे

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    क्यों इतने दूर हो मुझसेमेरे स्वप्नकि, तुम तककोई सीढ़ी पहुँच नहीं पाती?मैं चाहूँ जोडूँ जितनी भी कड़ियाँतुम तक मेरी पहुँचक्यों बन नहीं पाती? इतनी ऊँचाई का भीबताओ क्या फायदाकि, तुम…

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  • आम प्रेम

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    प्रेम जब पक नहीं पाताकसैला हो जाता है,उस आम की तरहजो न चूसा जा सकता हैन खाया जा सकता हैन बनाया जा सकता है अचार ही। हम अक्सर क्यों भूल…

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  • सावन क्यों इतना सुंदर है

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    सावन क्यों इतना सुंदर हैक्यों सोया प्रेम जगाता हैजो सांसें कब की टूट चुकीक्यों उनमें प्राण जगाता है? लहराते पेड़ों पर इठलाती डालीझूम रही है बदरा काली-कालीजो बातें कब की…

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  • खालीपन

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    कभी चाहे-अनचाहेहोना चाहिये खाली भी,क्योंकि,खाली में होती है सम्भावनाभरने की। खालीपन वो परमहंस है,जिनसे मिटता है भेद सत्य-असत्य काऔर मिल जाते हैं सच्चे मित्र। खालीपन यात्रा हैमनुष्य की देवत्व की…

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  • नशा

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    काश! किसी कोमेरा भी नशा हो जायेकोई मुझको भी ख़रीदेघोल ले अपने ख़ून मेंजिये मुझको अपनी साँसों में। शायद, अपना अस्तित्व खो कर हीमैं औरों को आनंद दे सकूँ। -प्रशान्त 

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  • मेरा संघर्ष

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    मेरा संघर्षउतना ही सुंदर हैजितनी मेरी पहली प्रेमिका। इतना सा अंतर बस दोनों मेंवो वक़्त के साथ ढल गयीये वक़्त के साथ निखर गया। सुनसान रात में जलता लैंप,मेरी किताबों…

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  • जीता कौन,हारा कौन?

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    कभी खाली होना तुमजब कुछ सालों बाद,तो इतनी मुरव्वत कर देनाबतला देना बस मुझको,जो खेला था सालों पहलेतुमने हमसे,उस खेल मेंथा जीता कौन और हारा कौन? -प्रशान्त

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  • पाक़ रूह

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    पाक़ रूह से गुफ़्तगू का नतीजा ये हैआइना देखने की आदत छूट गयी वो कुछ यूँ गये हमारी ज़िन्दगी सेहँसती हुयी ज़िन्दगी हमसे रूठ गयी कल उन्हें देखने की बहुत…

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