मेरे जज़्बों की जुम्बिश तुम्हारी धड़कन से है
जो तुम्हें चैन हो तो हमें भी कुछ चैन मिले
मेरे अक्स की तामील तेरी हर तस्वीर से है
जो तुम दिखो तो हमें भी कुछ चैन मिले
मेरी कसक का सबक तेरे रश्क़ से है
जो तुम हँसो तो हमें भी कुछ चैन मिले
मेरा तुझसे राब्ता तेरे हर ख़याल से है
जो तुम कुछ कहो तो हमें भी कुछ चैन मिले
मेरा कौन है जब तुम हो औरों से मरासिम
जो तुम मेरे बनो तो हमें भी कुछ चैन मिले
– अशान्त

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