उत्तरायण का सूरज

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

उत्तरायण सूरज है आज
मीठा तेरा तिल है आज ,
टीस बहुत है दिल में
मेरा चाँद दूर बहुत है आज।

शीत हवा की जाती है
मन में बेचैनी आती है,
साथ न कोई साथी है
खाली शब्दों की थाती है।

सूरज का इतना व्यापार
हुआ मकर रेखा के पार,
लोग सब आते जाते हैं
स्मृतियों का लगता अंबार।

बुकोव्स्की प्रेम को कहता है
वो स्वर्ग से आया कुत्ता है,
उसकी उसको कहने दो
एकल प्रेम हमारा सूरज है।

मेरी खिड़की वाला सूरज
तेरी खिड़की वाला सूरज,
दोनों को देखो देख रहा है
एक अकेला अपना सूरज।

समूह में खड़ी तुम एकाकी
दिल बहलाता मेरा सूरज,
तेरी खाली मांग को भर दे
मेरा प्रेमी सिंदूरी सूरज।

– अशान्त

– अशान्त

– Ashant

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