मैं पुराना ही अच्छा था शायद

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

मैं पुराना ही अच्छा था शायद
तब कोई भी बात मुझे
परेशान  नहीं करती थी,
और अब,
सफ़ेद शर्ट पर थोड़ा सा छींटा
कर देता है परेशान मुझे।

मैं पुराना ही अच्छा था शायद
तब न कोई मुंसिफ़ था और
न ही कोई वक़ील,
और अब,
एक छोटी सी बात भी
बड़ी लम्बी बहस बन जाती है।

मैं पुराना ही अच्छा था शायद
तब बिना बात हँसी भी
ना अटपटी लगती थी,
और अब,
आती हुयी हँसी भी
दब जाती है मुझमें कहीं।

मैं पुराना ही अच्छा था शायद
तब सीमित थे मायने प्रेम के
बस अपने घर तक ही,
और अब,
बड़ा सा प्रेम टूटते-बंटते
खो जाता है यूँ ही कहीं।

-प्रशान्त

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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Comments

3 responses to “मैं पुराना ही अच्छा था शायद”

  1. Big Bugs Online avatar

    बहुत बढ़िया. अदभुत….

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  2. Unknown avatar

    बढ़िया

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  3. Prashant avatar

    बहुत बहुत धन्यवाद!

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