चलो इश्क़ महकायें

– अशान्त ·

– Ashant ·

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चलो इश्क़ महकायें 

उस ख़ुशबू की तरह 
न बंद हो जो बोतल में 
बस ठहर जाये 
उस लम्हे की तरह 
जो रहेगा आज और कल 
एक सा 
तुम्हारी-मेरी तरह। 
इत्तेफ़ाकन खो भी जाये इश्क़ कभी 
पहचान लें हम उसको 
जैसे पुरानी डायरी में दबी लाइन 
महक रही है जो 
मोहब्बत से इतने सालों बाद भी 
ठीक वैसे 
महकता था जो मैं तुम जैसा 
सालों पहले। 
आओ पकड़ लिया जाये वो पल 
छूट गया था उस दिन 
जो वहीँ कहीं 
जहाँ हमने गर्म किये थे 
होंठ और दिल 
अपने हाथों बनी कॉफी से 
जिसकी मिठास सजाती है 
हमारी ज़बान आज भी।
मिल न सके इतने पर भी 
मान लो हम-तुम कभी 
बाँध लेना उँगलियों पर धागा 
चुपके से,पहन लूँगा मैं भी 
तुम्हारी मोहब्बत का ताबीज़ 
जो रहेगा तो 
पर दिखेगा नहीं 
मेरी हँसी और शर्ट के पीछे। 
-प्रशान्त  
 
  

– अशान्त

– Ashant

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