जन्नत में मुलाक़ात

– अशान्त ·

– Ashant ·

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मेरे ख़त्म होने से अगर तुम्हारी शुरुआत होती है,
तो मुझे मौत से भी गिले-शिकवात नहीं है ,
कई लफ्ज़ जो अनकहे रह गये,
सहेज कर रखूँगा मैं,
सुनते हैं जन्नत में कोई टोंक-टांक नहीं है

ख़त्म होकर भी अगर वफ़ा मुझे मिल जाये,
मेरे जाने के अरसों बाद तू जन्नत में मुझे मिल जाये,
जो इकरार यहाँ कर ना पाया,
वहां कर दूंगा मैं,
फरिश्तों को मोहब्बत से इन्सां की तरह एतराज़ नहीं है

ख़त्म हो जायेगा ये जिस्म खुशबू फिर भी रहेगी,
तेरी रूह के किसी कोने में मेरी जगह ज़रूर रहेगी,
तुम जब आओगी जन्नत में सब तोड़ कर रिवाजों के फंदे,
तुम्हे पहचान लूँगा,
जन्नत में सच्चाई पर कोई लिबास नहीं है

और अगर वहाँ भी आयी कोई दिक्कतें दरम्याँ,
कोई रस्म लाया कोई वायेज़ बताने को वहाँ,
तो इस बार चुप ना बैठूंगा मैं,
तुम्हे अपनाकर ही दम लूँगा,
सुनते हैं जन्नत में सज़ा कोई ख़ास नहीं है  

-अशांत 

– अशान्त

– Ashant

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