जो खुश हैं बर्बाद कर घर मेरा
ख़ुदा उनकी खैर करे
जुल्म किया है जिसने मेरी रूह पर
ख़ुदा उनकी खैर करे
ना कर पाये वो मोहब्बत और ना दोस्ती ही
ख़ुदा उनकी खैर करे
अपने फैसलों का कसूर दिया मुझे ही
ख़ुदा उनकी खैर करे
वो जो दौलत के शीशे में खुद को देख रहे
ख़ुदा उनकी खैर करे
रिश्तों को दिखावे की कसौटी पर परख रहे
ख़ुदा उनकी खैर करे
जिन का जागा है ईमान मेरे क़त्ल के बाद
ख़ुदा उनकी खैर करे
आज खुश हैं जो अपने ही दुश्मनों के साथ
ख़ुदा उनकी खैर करे
अपनी वहशत पर तकाज़ा जो इल्म का देते हैं
ख़ुदा उनकी खैर करे
इंसान से मज़ा ले पुराने बुतों सा फेंक देते हैं
ख़ुदा उनकी खैर करे
जो मेरे अश्कों पर खुल के हंस लेते हैं
ख़ुदा उनकी खैर करे
अज़ीम गुनाहों के बाद जो वाईज़ बने बैठे हैं
ख़ुदा उनकी खैर करे
-अशांत

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