अच्छा होता

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

मेरी कल्पना सत्य हो जाती तो अच्छा होता

मनुष्य मनुष्यता सीख लेता तो अच्छा होता 
भावनाएं ह्रदय से निकलती तो अच्छा होता
प्रेम प्रदर्शनी न बनता तो अच्छा होता
बातें मुंह पर होती तो अच्छा होता
प्रकृति दुही ना जाती तो शायद अच्छा होता
मित्रता व्यवसाय न बनती तो अच्छा होता
शिक्षा ज्ञान देती तो अच्छा होता
समता सत्ता में होती तो अच्छा होता

मेरी कल्पना सत्य हो जाती तो अच्छा होता
धरती बाटी न होती तो अच्छा होता
स्वतंत्रता ‘सबको’ मिलती तो अच्छा होता
पंचायती ‘न्याय’ ने जिस स्त्री को रुला दिया
वो स्त्री अगर न रोती तो अच्छा होता
खेल बच्चों तक ही रहते तो अच्छा होता
प्रतियोगिता मूल्यरहित ना होती तो अच्छा होता
‘गुरु’ अगर ‘शिक्षक’ ना बनते तो अच्छा होता
जीवन ‘कारखाना’ ना बनता तो अच्छा होता

मेरी कल्पना सत्य हो जाती तो अच्छा होता
वो बम न गिरता तो अच्छा होता
अहंकार किसी को ना डसता तो अच्छा होता
वो वायुयान हवा में ही उड़ता तो अच्छा होता
तेल सिर्फ सिर में लगता तो अच्छा होता
उस से पैसा ना उपजता तो अच्छा होता
मानव संघर्ष रक्तपिपासु न होता तो अच्छा होता
ईश्वर ‘एक’ ही होता तो अच्छा होता
ह्रदय स्वयं प्रार्थनास्थल होता तो अच्छा होता

मेरी कल्पना सत्य हो जाती तो अच्छा होता
नैतिकता के ठेकेदार ना होते तो अच्छा होता
भावनाओं का कोई दिन न होता तो अच्छा होता
चिट्ठियां दिल से लिखी जाती तो अच्छा होता
आकर्षण स्वाभाविक होता तो अच्छा होता
रक्त अगर कम बहता तो अच्छा होता
धन अगर जेब तक रहता तो अच्छा होता
प्रगति परस्पर होती तो अच्छा होता
सत्यता प्राथमिकता होती तो अच्छा होता


अशांत

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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Comments

3 responses to “अच्छा होता”

  1. Anonymous avatar
    Anonymous

    although the work was idealistic.. but i think if there would be no perfect to aim for then there would be no near to perfect and no parameter at all… last lines really made me think of something… idealistic yet different a bit though… and furthermore i would advise to deal each subject distinctly in forthcoming writing pieces…. just and advise but its purely meant as an aid rather as obstruction.. hope u take it that way…

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  2. Anonymous avatar
    Anonymous

    ये रचना, चूँकि लेखक की \”कल्पना की उड़ान\” है, जो कभी बंदिशों मैं नहीं हो सकती. शायद इसीलिए मेरे जैसे पाठक को ये उड़ान दिशाहीन लगी या दूसरे शब्दों मैं काफी ऊँची लगी. ये एक नया प्रयास है, जिसमें विचारों को भाषा की उलझनों मैं नहीं पिरोया गया है . मैं लेखक की कल्पना और और उसके विस्तृत भावों की कद्र करता हूँ. राहुल श्रीवास्तव

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  3. Anonymous avatar
    Anonymous

    I can not solve. [url=http://www.graj24.pl/nowe-gry-2.html]nowe gry[/url] | [url=http://www.graj24.pl/nowe-gry-2.html]nowe gry[/url]

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