पत्थरों का मोल

– अशान्त ·

– Ashant ·

· in

इस जहाँ में हमने सुना है

इबादत का कुछ ऐसा ही दस्तूर है

इंसानों का मोल कुछ नहीं

पर पत्थरों का मोल ज़रूर है।

इबादत मैंने भी की थी किसी की

वो जो शायद जहाँ में सबसे पाक था

पर उस खुदा ने भी धोखा ही दिया

मैंने सजदा छोड़ा तो फ़िर बुरा क्या किया?

अशांत

– अशान्त

– Ashant

अशान्त की चिट्ठी

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Comments

One response to “पत्थरों का मोल”

  1. भ्रम avatar

    ye hai choti si lekin impact bada chodti hai..

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