Relationships
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तीन डंठलों वाला पौधा
· कविताएँतुम्हारे दिये पौधे में बस तीन डंठलें बची हैं, सब दिखता है शीशे के गमले के आर-पार इसलिये उस में नहीं जमा होने दी कभी कोई गन्दगी; दावा तो नहीं…
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प्रशस्त-प्रेम
· कविताएँप्रिय मित्र ऋचा और अंकित की विवाह की चौथी वर्षगाँठ के अवसर पर एक छोटा सा प्रयास- कुछ यूँ सुंदर है प्यार तुम्हारा जैसे बोगनवेलिया के रंग-बिरंगे फूल कुछ यूँ…