प्रेम

  • दुआ

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    मैं जब भी गिरता ख़ुद ही उठ जाता थामाँ ने माँगी थीं बेपनाह दुआयें मेरे लिये एक दौर बड़ी कशमकश थी ज़िन्दगी मेंजब आये सुकून साथ लाये तुम मेरे लिये…

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  • प्रेम निवेदन

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    एक निवेदन तुमसे हैकरना तुम स्वीकार प्रिये,प्रेम रत्न से सदैव तुमकरना अपना श्रृंगार प्रिये। यह जीवन का सूर्य प्रखरशीतल हो तुम छाँव प्रिये,मैं पृथ्वी सा घूमूँ नित्यधुरी तुम मेरा तुम…

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  • प्रेमी मन

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    ये मौन प्रेम की प्रखर कल्पनानहीं यथार्थ में सुखदायी,प्रेम फलता है स्निग्ध स्नेह सेनहीं इसने आदर्शों की सत्ता चाही। नैतिकता बसती है स्वत्व मेंहै उसमें भी सहज अहं भाव,प्रेम निर्झर…

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  • परिभाषा

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    मुझे इस जीवन तक ले आयीप्रेम को परिभाषित करने की आकांक्षामोक्ष से भी बड़ी हो गयीप्रेम को परिभाषित करने की आकांक्षा;निरर्थक हो गये सदियों के प्रयत्नतुमसे मिलते ही,ज्ञात हुआ तुम्हें…

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  • दियलिया

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    रेलगाड़ी ने सीटी दे दी थी। इस बार अंजलि को विदा करने कोई नहीं आया था। किसी ने न तो हाथ पकड़े थे, न बोगी की जंग लगी रेलिंग और…

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