आध्यात्म
-
अनसुनी पुकार
· कविताएँक्यों तुम मुझसे रूठे रामबाधायें जीवन में अविराम,किस विधि स्तुति करूँ तुम्हारीजीवन मेरा भी बने अभिराम। शबरी को अपनाया तुमनेबाली को भी तारा है,मारुति के संग रण मेंतुमने रावण को…
-
मकर संक्रांति- आरम्भ कुम्भ 2019
· लेखअब तक अलसाया हुआ इलाहाबाद जैसे प्रयागराज बनते ही किसी नयी ऊर्जा से भर गया है। किसी चपल बालक की भाँति एक कदम में चार कदमों की छलाँग लगाते हुआ…