कविताएँ

कविताएँ और ग़ज़लें। Poems and ghazals in Hindi.

  • रुखसत

    ·

    उर्दू के मशहूर शायर  फ़िराक गोरखपुरी  ने कहा था- ” अब तुमसे रुखसत होता हूँ, आओ संभालो साज़े ग़ज़ल, नए तराने छेड़ो मेरे नग्मों को नींद आती है” B.A. LL.B.…

    Read →

  • उलझन

    ·

    इमारतें, कुर्सियां जिंदा हो जातीं हैं जब उन पर इंसान बैठते हैं दिमाग सन्नाटे से भीड़ में आता है जब कहीं विचार उबलते हैं  इश्क वही सच्चा है  जो आग…

    Read →

  • कुछ पल

    ·

    कुछ पल के बस ये दिन हैं कुछ दिन की बस ये बात है फिर समाँ बदल जाएगा बेफिक्री के इस जहाँ में फ़िक्र का बादल आएगा कुछ पल के बस…

    Read →

  • हे प्रेम

    ·

    Valentine’s Day (प्रेम दिवस) पर “प्रेम” को मेरी श्रद्धांजलि!!! हे प्रेम!! कहाँ तुम छुप गए क्यों दुबके हो तुम दिखावे के छोटे वस्त्रो में क्या इतनी आती है तुम्हे शर्म…

    Read →

  • हम वहां हो

    ·

    आप मुस्कुराएँ और हम वहां हों सारे आलम हो हुस्न के और हम वहां हों नहीं तमन्ना हमें ताज महल की छोटा सा घर हो आपका और हम वहां हों पतझड़ में गिरी…

    Read →

  • मेरा ज़िक्र

    ·

    मेरा ज़िक्र कहीं किया न करो ये मुमकिन है  तुम्हारी बातों से मुझे कोई चुरा न ले क्या ज़रूरत मुझे दुनिया के परदे पर लाने की कहीं ऐसा न हो …

    Read →

  • मिट्टी की तलाश में

    ·

    मन में जो आया बस उसे लिख रहा हूँ… पता नहीं ये कविता है कि नहीं!! ना ये पता है कि ये साहित्य किसी भी वर्ग में स्थान पाने के लायक…

    Read →

  • बहुत रंजिश है

    ·

    बहुत रंजिश है तेरे शहर में ऐ दोस्त मगर है सुकूनउसमे ईमान अब तलक बाकी हैक्या बयान करूँ हाल अपने शहर काहमारी आस्तीनों में पलते यहाँ सांप बहुत हैं पर ये…

    Read →

  • अच्छा होता

    ·

    मेरी कल्पना सत्य हो जाती तो अच्छा होता मनुष्य मनुष्यता सीख लेता तो अच्छा होता  भावनाएं ह्रदय से निकलती तो अच्छा होता प्रेम प्रदर्शनी न बनता तो अच्छा होता बातें मुंह…

    Read →

  • मुझको पता है

    ·

    मुझको पता हैतुमने मुझे मुस्कुराते हुए देखा हैये बात और है किभीड़ के परदे में छुपकरतुमने खुद को छुपा लियापर रोक न पाई अपनी आँखों की चमकजो पार कर झिझक…

    Read →