हिंदी
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दबे हुये बीज
· कविताएँहर एक मनुष्य किसान हैवो बोता है कई बीजइनकी आशा में-लहलहाती फ़सल,फल लदे पेड़,सुंदर फूलों के गुच्छे,और कुछ नहीं तोसुकून देने वाला हरापन। आशा असीमित नशा हैक्षितिज पर पहुँच कर…
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माँ से शिकायत
· कविताएँमेरी माँओं से शिकायत है वो अपने बेटों को खाना बनाना नहीं सिखातीं वो अपने बेटों को कपड़ा सिलना नहीं सिखातीं; रोटी और कपड़ा जीवन के मूलभूत प्रश्न हैं जिनके…
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हरा स्वेटर
· कविताएँएक उदास सी शाम में देखी तुम्हारी बेफ़िक्र हँसती तस्वीर जैसे किसी ने सर्द पैरों पर डाल दी रजाई, आँखों की आधी दूरी तक फैला काजल कुछ इधर कुछ उधर…