जीवन-दर्शन

  • असन्तोष

    ·

    उम्र के साथफैलता जाता है बरगदताड़ ऊँचा होता जाता है;शहर में दो बड़े आदमी हैंएक की जड़ों का अंत नहींदूसरा अकेले हवा खाता है;मिडल क्लास हो किंकर्तव्यविमूढ़लटका है त्रिशंकु साइन…

    Read →

  • बड़प्पन

    ·

    जो बैठे हैं शिखरों परनहीं सबके पाँव में छाले हैं,ऊपर चमक रही है कायापर अन्दर दिल बड़े काले हैं। हर सफल नहीं है समग्र पूज्यसब नहीं सच्चे साधन वाले हैं,“मैं”…

    Read →

  • प्रेम निवेदन

    ·

    एक निवेदन तुमसे हैकरना तुम स्वीकार प्रिये,प्रेम रत्न से सदैव तुमकरना अपना श्रृंगार प्रिये। यह जीवन का सूर्य प्रखरशीतल हो तुम छाँव प्रिये,मैं पृथ्वी सा घूमूँ नित्यधुरी तुम मेरा तुम…

    Read →

  • प्रेमी मन

    ·

    ये मौन प्रेम की प्रखर कल्पनानहीं यथार्थ में सुखदायी,प्रेम फलता है स्निग्ध स्नेह सेनहीं इसने आदर्शों की सत्ता चाही। नैतिकता बसती है स्वत्व मेंहै उसमें भी सहज अहं भाव,प्रेम निर्झर…

    Read →

  • दियलिया

    ·

    रेलगाड़ी ने सीटी दे दी थी। इस बार अंजलि को विदा करने कोई नहीं आया था। किसी ने न तो हाथ पकड़े थे, न बोगी की जंग लगी रेलिंग और…

    Read →